नवरात्रि तीसरा दिन: चंद्रघंटा की कथा, स्वरूप और पूजा विधि
भूत, प्रेत, पिशाच और सांप-भस्म से सजी एक ऐसी बारात, जिसे देखकर खुद दुल्हन के माता-पिता घबरा जाएं — चंद्रघंटा कथा की शुरुआत कुछ इसी नाटकीय दृश्य से होती है। नवरात्रि तीसरा दिन देवी के इसी स्वरूप को समर्पित है, जो जितना उग्र दिखता है, अंदर से उतना ही करुणामयी भी है। इस लेख में चंद्रघंटा कथा, उनका स्वरूप, मंत्र, शुभ रंग और चंद्रघंटा पूजा विधि — सब कुछ क्रम से जानेंगे।
नवरात्रि तीसरा दिन: चंद्रघंटा नाम कैसे पड़ा?
माथे पर घंटी जैसा दिखने वाला अर्धचंद्र — यही देवी की सबसे पहचानी जाने वाली निशानी है, और इसी से नाम बना चंद्रघंटा, यानी “चंद्रमा” और “घंटा” का मेल। नवरात्रि तीसरा दिन, यानी तृतीया तिथि, नवदुर्गा के इसी तीसरे रूप को समर्पित है, और भक्तों का मानना है कि चंद्रघंटा माता की पूजा से इस दिन निडरता और साहस का आशीर्वाद मिलता है।
चंद्रघंटा कथा — एक बारात जो डरावनी लगी
शिवजी जब पार्वती से विवाह करने हिमालय राज के द्वार पहुंचे, तो उनकी बारात में साधारण रिश्तेदार नहीं, बल्कि भूत-प्रेत, पिशाच और अघोरी गण शामिल थे — खुद महादेव के गले में सर्प और शरीर पर भस्म रमी हुई थी। यह दृश्य देखकर राजा हिमावन और रानी मैना बुरी तरह घबरा गए। ठीक उसी वक्त पार्वती ने चंद्रघंटा का रूप धारण किया, अपने परिवार को सांत्वना दी, और शिवजी को एक सौम्य, सुंदर रूप में आने के लिए मना लिया। चंद्रघंटा कथा असल में यही दिखाती है कि कैसे एक बेटी अपने प्रियजनों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में सामने आ सकती है।
देवी का स्वरूप — युद्ध के लिए तैयार, फिर भी शांत
दस भुजाओं में त्रिशूल, तलवार, गदा, धनुष-बाण, चक्र और घंटा जैसे अस्त्र-शस्त्र थामे यह देवी किसी भी क्षण युद्ध के लिए तैयार नजर आती हैं, और उनका वाहन सिंह इसी तेवर को और पुख्ता करता है। स्वर्ण जैसा चमकीला रंग और तीन नेत्र उनके तेज को और बढ़ाते हैं। इतने हथियारों के बावजूद माथे पर सजा घंटा-आकार का अर्धचंद्र एक अलग ही शांति का एहसास देता है — मानो कहना चाहती हों कि शक्ति और सौम्यता एक साथ रह सकती हैं।
चंद्रघंटा पूजा विधि — सरल तरीका
चौकी पर देवी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करके गंगाजल छिड़कें, फिर लाल या सुनहरे रंग के फूल अर्पित करें। धूप-दीप दिखाने के बाद चंद्रघंटा कथा सुनें, और मंत्र-जाप के साथ आरती करके पूजा पूरी करें। भोग में दूध से बनी मिठाई या खीर चढ़ाने की परंपरा है, और कई भक्त इस दिन घंटी बजाकर भी देवी का आह्वान करते हैं — मान्यता है कि इसकी ध्वनि नकारात्मकता को दूर भगाती है।
मंत्र और सुनहरे रंग का महत्व
“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः” — यह चंद्रघंटा मंत्र नवरात्रि तीसरा दिन पूजा में सबसे ज्यादा जपा जाता है। देवी के स्वर्ण-सम चमकीले स्वरूप को देखते हुए इस दिन सुनहरे या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। हमारी दुर्गा जी पोशाक कलेक्शन में सुनहरी आभा वाले नारंगी रंग के कुछ खूबसूरत विकल्प मौजूद हैं।
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चंद्रघंटा की पूजा से क्या आशीर्वाद मिलता है?
मणिपुर चक्र से देवी के इस रूप का संबंध बताया जाता है, जो आत्मविश्वास और साहस को जगाने वाला माना जाता है। जिन भक्तों के मन में किसी बात का डर या झिझक हो, उनके लिए चंद्रघंटा की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। साथ ही यह भी कहा जाता है कि देवी के इस रूप की पूजा से चेहरे और व्यक्तित्व में एक अलग तेज आता है। बेशक यह सब पारंपरिक श्रद्धा और मान्यताओं पर आधारित है, हर भक्त का अनुभव अलग हो सकता है।
चंद्रघंटा कथा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि तीसरा दिन और चंद्रघंटा कथा को लेकर भक्त अक्सर यह सवाल पूछते हैं।
नवरात्रि तीसरा दिन किस देवी को समर्पित है?
यह दिन नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप, माँ चंद्रघंटा को समर्पित है।
चंद्रघंटा नाम का मतलब क्या है?
माथे पर घंटी जैसा दिखने वाला अर्धचंद्र होने के कारण देवी को चंद्रघंटा कहा जाता है।
चंद्रघंटा की सवारी क्या है?
सिंह उनका वाहन माना जाता है।
चंद्रघंटा के कितने हाथ हैं?
देवी की दस भुजाएं हैं, जिनमें विभिन्न अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं।
चंद्रघंटा का शुभ रंग कौन-सा है?
स्वर्ण जैसा चमकीला और नारंगी रंग देवी से जोड़कर देखा जाता है।
निष्कर्ष
ताकत और ममता एक साथ कैसे दिख सकती हैं — चंद्रघंटा कथा यही समझाती है। नवरात्रि तीसरा दिन पूजा करते हुए बस इतना याद रखिए कि हथियार उठाना भी कभी-कभी प्रेम जताने का एक तरीका हो सकता है।
अधिक जानकारी के लिए हिंदी विकिपीडिया पर चंद्रघंटा का पेज भी देखा जा सकता है। नवरात्रि दूसरे दिन की ब्रह्मचारिणी कथा जानने के लिए हमारा ब्रह्मचारिणी कथा वाला लेख भी पढ़ सकते हैं। नवरात्रि चौथे दिन की कूष्मांडा कथा जानने के लिए हमारा कूष्मांडा कथा वाला लेख भी जरूर पढ़ें।