Festivals

नवरात्रि चौथा दिन: कूष्मांडा की कथा, स्वरूप और पूजा विधि

कूष्मांडा कथा

सृष्टि के जन्म से पहले चारों ओर सिर्फ अंधकार था, न कोई जीवन, न कोई रोशनी — कूष्मांडा कथा यहीं से शुरू होती है। नवरात्रि चौथा दिन इसी अंधकार को चीरने वाली देवी को समर्पित है, जिन्होंने अपनी मुस्कान भर से पूरे ब्रह्मांड में ऊर्जा भर दी थी। इस लेख में कूष्मांडा कथा, उनका स्वरूप, मंत्र, शुभ रंग और कूष्मांडा पूजा विधि — सब कुछ क्रम से जानेंगे।

Table of Contents

नवरात्रि चौथा दिन: कूष्मांडा नाम का मतलब क्या है?

“कू” यानी थोड़ा, “उष्म” यानी गर्मी, और “अंड” यानी अंडा — मिलाकर बनता है कूष्मांडा, यानी अपनी हल्की गर्मी से सृष्टि के अंडे को जन्म देने वाली देवी। एक और मान्यता के अनुसार कुम्हड़ा (कद्दू) उन्हें सबसे प्रिय भोग है, और यहीं से भी यह नाम जुड़ा माना जाता है। नवरात्रि चौथा दिन नवदुर्गा के इसी चौथे रूप, कूष्मांडा माता को समर्पित है।

कूष्मांडा कथा — अंधकार में एक मुस्कान से जन्मी रोशनी

सिर्फ एक मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड में रोशनी और गर्माहट भर देना — कूष्मांडा कथा की यही सबसे अनोखी बात है। जटुकासुर नामक राक्षस का वध चंद्रघंटा के हाथों हो चुका था, फिर भी चारों तरफ सन्नाटा और गहरा अंधकार पसरा हुआ था, न कोई जीवन था न कोई हलचल। आदिशक्ति ने तभी कूष्मांडा का रूप लेकर इस खालीपन को भरा, और उनकी मुस्कान से जो ऊर्जा फैली, उसी से सूर्य जितनी तेजस्विता जन्मी। यही वजह मानी जाती है कि देवी आज भी सूर्य के भीतर निवास करती हैं, और सूर्य की चमक असल में उन्हीं की चमक है।

देवी का स्वरूप — आठ भुजाओं वाली अष्टभुजा देवी

कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र और गदा — सात हाथों में यह सब लिए हुए, आठवें हाथ में जप माला थामे देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है। यह माला अष्ट सिद्धि और नव निधि देने वाली मानी जाती है। सिंह पर सवार, मुस्कुराते चेहरे वाली यह देवी जितनी तेजस्वी दिखती हैं, उतनी ही ममतामयी भी लगती हैं — कुछ जगहों पर उनके वाहन को बाघ भी बताया जाता है, पर ज्यादातर स्रोत सिंह को ही सही मानते हैं।

कूष्मांडा पूजा विधि — सरल तरीका

चौकी पर देवी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करके गंगाजल छिड़कें, फिर पीले फूल अर्पित करें। धूप-दीप दिखाने के बाद कूष्मांडा कथा सुनें, और मंत्र-जाप के साथ आरती करके पूजा पूरी करें। भोग की बात करें तो कुम्हड़े यानी कद्दू से बनी कोई मिठाई या मालपुआ चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यही देवी का सबसे प्रिय भोग बताया गया है।

मंत्र में छुपा एक अनोखा फर्क, और पीले रंग का महत्व

“या देवि सर्वभूतेषु सृष्टि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः” — यह कूष्मांडा मंत्र बाकी नवदुर्गा मंत्रों से थोड़ा अलग है, क्योंकि यहां देवी के नाम की जगह “सृष्टि रूपेण” शब्द आता है — सृष्टि की रचयिता होने का सीधा संकेत। नवरात्रि चौथा दिन का शुभ रंग पीला माना जाता है, जो ऊर्जा और उजाले का प्रतीक है। हमारी दुर्गा जी पोशाक कलेक्शन में पीले रंग के कुछ और सुंदर विकल्प भी मौजूद हैं।

Yellow Oil Paint Mata Rani Poshak

Price range: ₹19.00 through ₹69.00

A Yellow Oil Paint Poshak for Mata Rani, the same gold foil print on a golden-yellow base.

Select options This product has multiple variants. The options may be chosen on the product page

Heavy Resham embroidery Yellow Mata Rani Langha Patka

Price range: ₹160.00 through ₹230.00

A Yellow Red Diamond Lehnga for Durga Maa, a golden field with red diamonds and a varied border.

Select options This product has multiple variants. The options may be chosen on the product page

Elegant Heavy Pearl Stone Work Yellow Lehnga Patka For DurgaMaa

Price range: ₹190.00 through ₹390.00

A Yellow Pearl Stone Lehnga for Durga Maa, shown dressed on the actual multi-armed Durga idol.

Select options This product has multiple variants. The options may be chosen on the product page

Yellow Diamond Print Lehnga for Devi Durga

Price range: ₹79.00 through ₹110.00

A Yellow Diamond Print Lehnga for Devi Durga, closing out this six-colour diamond print line.

Select options This product has multiple variants. The options may be chosen on the product page

कूष्मांडा की पूजा से सेहत और ऊर्जा कैसे जुड़े हैं?

अनाहत चक्र से देवी के इस रूप का नाता बताया जाता है, जो अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा और निर्णय-शक्ति से जुड़ा है। जो भक्त थकान, आलस्य या मानसिक कमजोरी महसूस करते हों, उनके लिए कूष्मांडा की आराधना खासतौर पर लाभकारी मानी जाती है। यह भी कहा जाता है कि देवी की कृपा से रोग-दोष दूर होते हैं और शरीर में नई ऊर्जा आती है। बेशक ये सारी बातें परंपरागत श्रद्धा पर टिकी हैं, इन्हें चिकित्सकीय दावे के तौर पर न लें।

कूष्मांडा कथा से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नवरात्रि चौथा दिन और कूष्मांडा कथा को लेकर भक्त अक्सर यह सवाल पूछते हैं।

नवरात्रि चौथा दिन किस देवी को समर्पित है?

यह दिन नवदुर्गा के चौथे स्वरूप, माँ कूष्मांडा को समर्पित है।

कूष्मांडा की सवारी क्या है?

सिंह उनका वाहन माना जाता है।

कूष्मांडा के कितने हाथ हैं?

देवी की आठ भुजाएं हैं, इसीलिए उन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है।

कूष्मांडा को कौन-सा भोग पसंद है?

कुम्हड़े (कद्दू) से बनी मिठाई या मालपुआ सबसे प्रिय भोग माना जाता है।

कूष्मांडा का शुभ रंग कौन-सा है?

पीला रंग देवी से जोड़कर देखा जाता है।

निष्कर्ष

सबसे गहरे अंधकार को भी एक मुस्कान से रोशन किया जा सकता है — कूष्मांडा कथा यही सिखाती है। नवरात्रि चौथा दिन पूजा करते समय बस इतना याद रखिए कि हर नई शुरुआत के पीछे एक ऐसी ही छोटी लेकिन असरदार रोशनी होती है।

अधिक जानकारी के लिए हिंदी विकिपीडिया पर कूष्मांडा का पेज भी देखा जा सकता है। नवरात्रि तीसरे दिन की चंद्रघंटा कथा जानने के लिए हमारा चंद्रघंटा कथा वाला लेख भी पढ़ सकते हैं। नवरात्रि छठे दिन की कात्यायनी कथा जानने के लिए हमारा कात्यायनी कथा वाला लेख भी जरूर पढ़ें।