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नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): अभ्यंग स्नान, पूजा विधि और यम दीपदान

नरक चतुर्दशी

धनतेरस के अगले दिन और मुख्य दिवाली से एक दिन पहले, दिवाली उत्सव का दूसरा दिन आता है — इसे ही नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली कहा जाता है। इस दिन की सबसे खास बात है सूर्योदय से पहले किया जाने वाला स्नान, जिसे लेकर हर साल कई भक्त इसकी सही विधि जानना चाहते हैं। इस लेख में हम पूरी परंपरा, स्नान का तरीका और शाम के दीपदान के बारे में बताएंगे।

तिथि: 7 नवंबर 2026 (शनिवार) — नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

ध्यान दें: चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर सुबह से 8 नवंबर सुबह तक रहती है, इसलिए कुछ पंचांगों और दक्षिण भारत की परंपरा में इसे 8 नवंबर को भी मनाया जाता है — ज्यादातर उत्तर भारतीय परिवार 7 नवंबर को ही मनाते हैं

ध्यान दें: सटीक समय आपके शहर के अनुसार थोड़ा बदल सकता है — स्थानीय पंचांग से एक बार जरूर मिला लें। (डिस्क्लेमर पढ़ें)

नरक चतुर्दशी कब और क्यों मनाई जाती है?

यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को, धनतेरस के अगले दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक स्नान और पूजा करने वाले व्यक्ति को यमलोक नहीं देखना पड़ता — इसी वजह से इसे पाप-नाश और शुद्धिकरण का दिन भी माना जाता है। छोटी दिवाली नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह मुख्य दिवाली से ठीक एक दिन पहले आता है और घर की सजावट यहीं से शुरू हो जाती है।

अभ्यंग स्नान क्या है और कैसे करें?

नरक चतुर्दशी की सबसे पहचानी हुई परंपरा है अभ्यंग स्नान — सूर्योदय से पहले तिल या सरसों के तेल में हल्दी मिलाकर पूरे शरीर पर हल्की मालिश की जाती है, उसके बाद उबटन लगाकर स्नान किया जाता है। इसे शरीर की शुद्धि और तेज बढ़ाने वाला माना जाता है, और परिवार के सभी सदस्य मिलकर इस दिन जल्दी उठकर यह स्नान करते हैं।

नरक चतुर्दशी पूजा विधि

स्नान के बाद घर में भगवान श्रीकृष्ण, यमराज, मां लक्ष्मी और हनुमान जी की पूजा की जाती है। हर देवता की पूजा का अपना कारण है — कृष्ण जी नरकासुर वध की कथा से जुड़े हैं, यमराज दीर्घायु के लिए पूजे जाते हैं, और लक्ष्मी-पूजन अगले दिन की मुख्य पूजा की तैयारी जैसा होता है।

यम दीपदान की परंपरा

शाम होते ही घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके एक चौमुखी दीया जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। यह दीया यमराज को समर्पित होता है, और मान्यता है कि इससे घर में अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। यही एक कारण है जिससे नरक चतुर्दशी को दीयों के त्योहार की असली शुरुआत भी माना जाता है।

घर की सफाई और सजावट की शुरुआत

छोटी दिवाली से ही ज्यादातर घरों में मुख्य दिवाली की तैयारी शुरू हो जाती है — रंगोली, दीये और तोरण की सजावट इसी दिन से सजने लगती है, ताकि अगले दिन घर पूरी तरह तैयार रहे। कई परिवार इसी दिन पूजा घर की भी विशेष सफाई करते हैं, ताकि मुख्य दिवाली पर लक्ष्मी-पूजन के लिए स्थान पहले से शुद्ध और व्यवस्थित रहे। इस तरह देखा जाए तो नरक चतुर्दशी सिर्फ स्नान-पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे घर को अगले दिन के उत्सव के लिए तैयार करने का दिन भी है।

दीये और सजावट का सामान कैसे चुनें?

चौमुखी दीया और साधारण मिट्टी के दीये दोनों की जरूरत इस दिन पड़ती है — एक यम दीपदान के लिए, बाकी घर को रोशन करने के लिए। हमारे पूजा सामग्री कलेक्शन में ब्रास के सुंदर दीये मौजूद हैं, जो नरक चतुर्दशी से लेकर पूरी दिवाली तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

नरक चतुर्दशी पर ध्यान रखने योग्य बातें

  • अभ्यंग स्नान के लिए तेल और उबटन एक रात पहले ही तैयार कर लें।
  • यम दीपदान का दीया शाम को सूर्यास्त के तुरंत बाद जलाना बेहतर माना जाता है।
  • छोटे बच्चों को भी हल्के तेल-उबटन से स्नान कराया जा सकता है, यह कोई कठोर नियम नहीं है।

Frequently Asked Questions (FAQ)

नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली में क्या फर्क है?

कोई फर्क नहीं, यह एक ही त्योहार के दो नाम हैं।

अभ्यंग स्नान किस समय करना चाहिए?

सूर्योदय से पहले, यही सबसे शुभ समय माना जाता है।

यम दीपदान का दीया किस दिशा में जलाना चाहिए?

घर के मुख्य द्वार पर, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके।

क्या यह पूजा हर परिवार के लिए अनिवार्य है?

नहीं, यह एक परंपरा है — कई परिवार इसे मानते हैं, कई अपने तरीके से त्योहार मनाते हैं।

क्या नरक चतुर्दशी पर व्रत भी रखा जाता है?

कुछ भक्त इस दिन हल्का व्रत रखते हैं, लेकिन यह अभ्यंग स्नान जितना सार्वभौमिक नहीं है — ज्यादातर परिवारों में सिर्फ स्नान और पूजा ही निभाई जाती है।

निष्कर्ष

नरक चतुर्दशी की परंपरा — सुबह का अभ्यंग स्नान, दिनभर की पूजा, और शाम का यम दीपदान — दिवाली उत्सव को एक सार्थक शुरुआत देती है। पिछले दिन की तैयारी के लिए हमारी धनतेरस गाइड देखें, और अगले दिन की मुख्य लक्ष्मी पूजा की पूरी जानकारी के लिए हमारी दिवाली लक्ष्मी पूजा गाइड भी जरूर पढ़ें।

नरक चतुर्दशी से जुड़ी और जानकारी के लिए नरक चतुर्दशी (विकिपीडिया) भी देखा जा सकता है।

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